Saturday, August 30, 2014
Sunday, August 24, 2014
हर शख़्स सही
किस डगर चले
किस ओर चले
क्या बुलाए तुम्हे
क्यों उधर चले
सब समान है
ये जो जहाँ है
हर मोड़ वही
हर शख़्स सही
जो सुनी नहीं
वोह आवाज़ थी
किस मुकाम से
ये खबर नहीं
जो सही लगे
वोह भी गलत है
और जो गलत लगे
वोह भी सही है
कौन से चश्मों से देखा जहाँ
बस वहीँ से अंतर दिख गया
मन का यह जो दर्पण है
अजब ही यह विलक्षण है
जिसने मन को थाम लिया
बस उसी का जीवन सक्षम है
Tuesday, August 19, 2014
Subscribe to:
Posts (Atom)
कुछ पंक्तियाँ जीवन की डगर पर चलते कुछ कदम ये ऊंची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी सी कठिन डगर हे पथिक - ये जाना तुमने ? मार्ग मनःस्ति...
-
Haiku on the changing seasons... "Changing hues Leaves life sky Seasons perspective vision" another one ...
-
The music of the stars the rhythm of the planetery movements the fabric of this universe the miracle that life defines in it...


