Saturday, April 27, 2019




 कुछ पंक्तियाँ

जीवन की डगर पर चलते कुछ कदम 
ये ऊंची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी  सी कठिन डगर 
हे पथिक - ये जाना तुमने ? 
मार्ग मनःस्तिथि का जो आपस में मेल है 
सत्य  का चश्मा , धैर्य की छतरी 
विश्वास के खड़ाऊ' तो मार्ग सहज है

Friday, April 26, 2019





कुछ राही हैं
कुछ राहें हैं।
कहीँ धूप है
कभी छाव है।
परछाईयां हैं
बयार है-
जानी पहचानी ।
कभी अन्जानी
बारिश की बूंदे
कभी तूफान है।
कुछ मोड़ हैं
कभी दोराहा है।
ये जीवन है
यही वजूद है
यही हर शक्स
की कहानी है
ये जीवन है
यही वजूद है


Colors that sparkle, hues that brighten
Colors of the sun as we partake our journey around it.
Reality etched with the rays on the retina
Sparking imagination of the colours that we can't yet see.
Oh so beautiful , the nature of nature's mystery
Guiding learning and the evolving Vision for humanity.

Friday, February 15, 2019





चाँद

और बाहर जाते ही दिखा था वो
चढ़ता हुआ , घटता हुआ
हँसता हुआ , बिलखता हुआ
कभी आधा , कभी पूरा
कभी दमकता हुआ और
कभी अपने दुःख के कालापानी
में पूर्ण रूप से डूबा हुआ।

चांदी सा चमकता हुआ
कभी हीरे की पतली लड़ी
सा यूँ ही दमकता हुआ।
कभी बूढी दादी के चरखे
को प्रतिबंबित करता हुआ
और कभी ईद के सितारे
के सामीप्य में आकाश को सजाता हुआ





वक़्त 

यह वक़्त का तक़ाज़ा है
कि वक़्त ही तो महंगा है
एक वक़्त जब सीखा नहीं
अब हर वक़्त कुछ सिखाता है


इस वक़्त विशक्त के चक्कर में
हर वक़्त ये हैरानी कैसी है
जो बीत गया सो कहानी है
अब आगे की जिंदगी निभानी है







कोपल

कोपल अनमनी सी आँख खुली
क्या धूप निकली झुटपुटी सी ?
हरित वातावरण को निहारते
उसी हरियाली में से झांकते 
लघु पौधे समेटते सूर्य प्रकाश सकल 
धरती की गोद में पावन संचित जल 

कोपल अनमनी सी आँख खुली
क्या सूर्य बढ़ा शिखर की ओर ?
ये ब्रह्मांड एक पाठशाला नयी
इसमें ढूंढते, गूढ़ पुराने प्रश्न वही
वातावरण को समेट सीखते हर पल
क्या राह चुने ये ढूंढते व्याकुल 

कोपल अनमनी सी आँख खुली'
क्या धूप चढ़ी क्षितिज के पार ?
लम्बी डगरों के पार्श्व में
बांटते राहियों कि टोह में
चढ़ती धूप में छाँह निर्मल
लम्बी राहों के ये सम्भाल 

कोपल अनमनी सी आँख खुली
क्या लालिमा ये शाम की ?
ये जीवन सकल ये बीत गया
क्या सीखा क्या दिया यहाँ
पल , समय का ये घूमता मंडल
पूछता लेखा जीवन का ये अंचल


 कुछ पंक्तियाँ जीवन की डगर पर चलते कुछ कदम  ये ऊंची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी  सी कठिन डगर  हे पथिक - ये जाना तुमने ?  मार्ग मनःस्ति...