Saturday, August 30, 2014

धरती का श्रृंगार
















प्रभात प्रकाश प्रज्वलित प्राणंग
नीलिमा आवर्तित ये गगन आँगन
अलौकिक आकर्षक दमकते आभूषण
धरती का श्रृंगार रचाते सुदर्शन

ओस की दमकती मोतियों की लड़ी
सुनहरे जालों पर ये मढ़ चली
इस अलौकिक हार की छठा
सूर्य का मांग टीका बादलों की घटा
गुलाब बेला  का इत्र फैलाती ये हवा
रंगीन फूलों की ओढनी ले चली उड़ा 

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