Friday, September 5, 2014

जिनसे हमने पढ़ना सीखा




शब्दों का कोई मोल नहीं है
लफ्जों का कोई तोल  नहीं है


उन सबसे जिनसे हमने पढ़ना सीखा
जीना सीखा हँसना सीखा

धीरज से या क्रोध सहित
प्यार भरे अनुशाशन मिश्रित
सबको  राह दिखलाते जो
जीवन के पहलू समझाते जो

कुछ ऐसे विरले गुरु मिले
जो बिना बोले ही सिखला गए
हाथ पकड़ के न सिखलाया
खुद के उदहारण से समझा गए


वो सदियों से ज्ञान बाटने वाले
उन सभी को शत नमन है

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