Friday, May 11, 2012

Parinde




"परिंदे" 



आकाश में परिंदे 
झुण्ड में उड़ते 
चित्रकारी करते 
कभी इधर और 
पल में उधर 

कुछ ढूँढ़ते ?
हाँ वहां नीचे 
रेत के टीलों में 
धूल के गुबार के बीच 
कहीं कुछ हरा भरा 

बढती अराजकता के बीच 
कहीं थोडा अनुशाशन
हिंसा , डकैती , हत्याओं के बीच 
कहीं थोड़ी मानवता 
ठूँठे उरो कें बीच 
कहीं थोडा प्यार  




No comments:

Post a Comment

 कुछ पंक्तियाँ जीवन की डगर पर चलते कुछ कदम  ये ऊंची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी  सी कठिन डगर  हे पथिक - ये जाना तुमने ?  मार्ग मनःस्ति...