"परिंदे"
आकाश में परिंदे
झुण्ड में उड़ते
चित्रकारी करते
कभी इधर और
पल में उधर
कुछ ढूँढ़ते ?
हाँ वहां नीचे
रेत के टीलों में
धूल के गुबार के बीच
कहीं कुछ हरा भरा
बढती अराजकता के बीच
कहीं थोडा अनुशाशन
हिंसा , डकैती , हत्याओं के बीच
कहीं थोड़ी मानवता
ठूँठे उरो कें बीच
कहीं थोडा प्यार
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